राक्षसराज रावण और पक्षिराज जटायु का अद्भुत युद्ध

Post Views: 136राक्षसराज रावण और पक्षिराज जटायु का अद्भुत युद्ध श्रीराम की पंचवटी में निर्मित कुटीर से कुछ ही दूरी पर स्थित होकर पक्षिराज जटायु …

भक्तप्रवर पक्षिराज जटायु

Post Views: 78भक्तप्रवर पक्षिराज जटायु श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के अनुसार भगवान् राम जब पंचवटी प्रस्थान कर रहे थे । उस समय मार्ग में उन्हें पक्षिराज “जटायु” …

“सर्वधर्मान् परित्यज्य” से भगवान् ने गीता में क्या सभी धर्मों का त्याग कहा ?

Post Views: 232“सर्वधर्मान् परित्यज्य” से भगवान् ने गीता में क्या सभी धर्मों का त्याग कहा ? भगवान् ने गीता में पार्थ से कहा कि “सम्पूर्ण …

स्त्रियों, वैश्यों तथा शूद्रों को भगवद्गीता के अनुसार पापयोनि कहना मात्र अज्ञान है

Post Views: 863“स्त्रियों, वैश्यों तथा शूद्रों को भगवद्गीता के अनुसार पापयोनि कहना मात्र अज्ञान है” भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में – “मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य …

गुरु के भेद

Post Views: 156शास्त्रों में गुरु के १२ भेद बतलाये गए हैं १-अध्यापक, २-पिता, ३-ज्येष्ठभाई, ४-राजा, ५-मामा, ६-श्वसुर, ७-रक्षक, ८-नाना, ९-पितामह, १०-बन्धु, ११-अपने से बड़ा, १२- …

साधकों के लिए कल्पवृक्ष–”एकादशमुखहनुमत्कवच”

Post Views: 1,131साधकों के लिए कल्पवृक्ष– ”एकादशमुखहनुमत्कवच” यह एकादशमुख हनुमत्कवच साधकों के लिए सौम्य तथा शत्रुसमूह का विशेष संहारक है । यह कवच सम्पूर्ण राक्षसों …

हनुमानचालीसा में “संकरसुवन” पाठ के औचित्य में प्रमाण

Post Views: 287हनुमानचालीसा में “संकरसुवन” पाठ के औचित्य में प्रमाण किसी भी महापुरुष के ग्रन्थ में पाठपरिवर्तन महापराध है । लिपिकारों से प्रमाद की सम्भावना …

व्याकरणदृष्ट्या भी “संकर सुवन” पाठ ही प्रामाणिक है

Post Views: 102व्याकरणदृष्ट्या भी “संकर सुवन” पाठ ही “हनुमानचालीसा” में सर्वथा प्रामाणिक है, अन्य नही शब्दकल्पद्रुम में प्रमाणपूर्वक यह तथ्य प्रस्तुत किया गया है – …

हनुमानचालीसा में “संकर स्वयं” नहीं अपितु “संकर सुवन” ही प्रामाणिक

Post Views: 106हनुमानचालीसा में “संकर स्वयं” नहीं अपितु “संकर सुवन” ही प्रामाणिक पाठ है। किसी भी महापुरुष के ग्रन्थ में पाठपरिवर्तन महापराध है । लिपिकारों …

शरणागति के अंग और उसकी विधा

Post Views: 514शरणागति के ६ अंग इसी का दूसरा नाम “प्रपत्ति” तथा “न्यासविद्या” भी है । यह उपनिषदों में वर्णित ब्रह्मविद्याविशेष है और निश्चयात्मक ज्ञानस्वरूपा …

सिद्ध विद्वान् सन्त श्रीशास्त्री जी महाराज

Post Views: 56सिद्ध विद्वान् सन्त श्रीशास्त्री जी महाराज, रामघाट, अयोध्या सन्तों की जन्मस्थली,कुल और जननी ये सब उन महापुरुषों की साधना,उदात्त भावना तथा उनके भगवत्साक्षात्कार …