अध्याय ३७,नागह्रद तीर्थ का माहात्म्य

Post Views: 37 ॥ पुलस्त्य उवाच ॥ पुलस्त्य जी बोले–   ॥ नागह्नदं ततो गच्छेत्तीर्थंं पापप्रणाशनम् ॥  यत्र नागैस्तपस्तप्तं रम्ये पर्वतरोधसि ॥ १ ॥ हे राजन्! …

समाप्तपुनरातत्त्व दोष

Post Views: 72 समाप्त पुनरातत्व काव्य का दोष है | साहित्य दर्पणकार ने ” नाशयन्तो घनध्वान्तं तापयन्तो वियोगिनः | पतन्ति शशिनः पादाः भासयन्तः क्षमातलम् “|| …