Post Views: 29 भाषा कोई भी हो उसका प्रयोजन समस्त व्यवहारों का सम्पादन है । हम ” घटम् आनय” के स्थान पर “गगरी या घड़ा …
Category: माननीय विचार
Post Views: 152 यो ददाति सदा दु:खं सज्जनान् वाथ साधकान्। तेन पापेन दुष्टात्मा निरयं याति सत्वरम्।। जो प्राणी सज्जनों अथवा साधकों को सदा दु:खी करता …
