श्रीसूक्त मन्त्र–८ की हिन्दी व्याख्या एवं पुरश्चरण

Post Views: 339    ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् | अभूतिमसमृद्धिं मे सर्वां निर्णुद मे गृहात् ||8|| व्याख्या—भक्त  को अपने भूख प्यास ,सुखादि-संसाधनों के अभाव को …

श्रीसूक्त मन्त्र – १०

Post Views: 173 श्रीसूक्त मन्त्र — १० की व्याख्या ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि | पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ||१०|| व्याख्या– इस ऋचा के द्वारा भगवती श्री …

श्रीसूक्त मन्त्र-९

Post Views: 286 श्रीसूक्त मन्त्र-९ की व्याख्या ॐ गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् | ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ||९|| व्याख्या— इस ऋचा के द्वारा श्री जी …

श्रीसूक्त मन्त्र-7

Post Views: 65 श्रीसूक्त मन्त्र-7 की व्याख्या   ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह । प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्टेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥7॥        व्याख्या –हे भगवती …

श्रीसूक्त मन्त्र -६

Post Views: 195 श्रीसूक्त मन्त्र -६ ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।  तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥6॥  आदित्यवर्णे -हे सूर्य के सदृश कान्ति …

श्रीसूक्त मन्त्र-५

Post Views: 94 श्रीसूक्त मन्त्र-५ ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् | तां पद्मनीमीं शरणमहं प्रपद्ये अलक्षमीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ||५|| व्याख्या—चतुर्थ ऋचा …

श्रीसूक्त मन्त्र-४ की व्याख्या

Post Views: 75 श्रीसूक्त मन्त्र-४ की विशद हिन्दी व्याख्या ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारमार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् |           पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ||४||       …

श्रीसूक्त: मन्त्र-3 की व्याख्या

Post Views: 76 श्रीसूक्त: मन्त्र-3 की व्याख्या   अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् | श्रियं देवीमुह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ||३|| अन्वय–अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् श्रियं देवीम् उपह्वये ,श्रीः …

श्रीसूक्त : मन्त्र-2 की व्याख्या

Post Views: 179 श्रीसूक्त : मन्त्र-2 की व्याख्या ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥2॥ अन्वय-जातवेदः ! तां अनपगामिनीं …

श्रीसूक्त : मन्त्र-1 की हिन्दी व्याख्या

Post Views: 350 श्रीसूक्त, मन्त्र-1   ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥1॥ अन्वय- हे जातवेदः हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् चन्द्रां …