Post Views: 157 हनुमत्सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ से शत्रुनाश, संपत्ति प्राप्ति एवम् परकृत मारण,मोहन, उच्चाटन आदि अभिचार कर्मों का विनाश होता है। एक साधक को …
Category: श्री हनुमान जी
Post Views: 876 एकादशमुख हनुमत्कवच के पुरश्चरण की विधि- इस कवच के ४०००० पाठ का विधान है जो “चत्वारिंशत्सहस्राणि पठेच्छुद्धात्मना नरः” श्लोक में लिखा है …
Post Views: 1,048 साधकों के लिए कल्पवृक्ष– ”एकादशमुखहनुमत्कवच” यह एकादशमुख हनुमत्कवच साधकों के लिए सौम्य तथा शत्रुसमूह का विशेष संहारक है । यह कवच सम्पूर्ण …
Post Views: 275 हनुमानचालीसा में “संकरसुवन” पाठ के औचित्य में प्रमाण किसी भी महापुरुष के ग्रन्थ में पाठपरिवर्तन महापराध है । लिपिकारों से प्रमाद की …
Post Views: 84 व्याकरणदृष्ट्या भी “संकर सुवन” पाठ ही “हनुमानचालीसा” में सर्वथा प्रामाणिक है, अन्य नही शब्दकल्पद्रुम में प्रमाणपूर्वक यह तथ्य प्रस्तुत किया गया है …
Post Views: 88 हनुमानचालीसा में “संकर स्वयं” नहीं अपितु “संकर सुवन” ही प्रामाणिक पाठ है। किसी भी महापुरुष के ग्रन्थ में पाठपरिवर्तन महापराध है । …
Post Views: 72 हनुमान जी का अद्भुत पराक्रम वीर वेशमारुति जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने १००० अमर राक्षसों को …
Post Views: 159 विप्र–मौलवी और पादरी साहब आप दोनों तो खुदा और ईशा से मिलने गये थे । यहां थे ही नहीं । तो मैं …
Post Views: 1,271 श्रीगणेशाय नम: ॥ श्रीदक्षिणामूर्तिगुरुभ्यो नम: ॥ देव्युवाच–शैवानि गाणपत्यानि शाक्तानि वैष्णवानि च । कवचानि च सौराणि चान्यानि यानि तानि च ॥१॥ श्रुतानि देवदेवेश …
Post Views: 518 🌺🌹ओम् नमो भगवते बजरंग वीर लोहे की गदा वज्र का सोंटा तेल सिंदूर की पूजा सवा मन का रोट माता जानकी जी …
Post Views: 129 यात्राकाल में हनुमत्स्मरण से लाभ हम यात्रा जब करते है तब किसी दुर्घटना या चोर डाकुओं के भय अथवा शत्रुओं से किसी …
Post Views: 183 हे आंजनेय हे पवनपुत्र हे महाबली करुणानिधान । हे अक्षविजेता महाशूर हे महादेव शतकोटि भान ।। हे प्रलयंकर रघुवरकिंकर हे महातेज गन्धर्वगान …
Post Views: 54 जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने १००० अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने का आदेश …
Post Views: 327 हनुमान जी की उपासना से प्रमुख देवों की उपासना स्वयं सिद्ध अगस्त्यसंहिता के अनुसार हनुमान् जी का एकादशमुखस्वरूप –आचार्य सियारामदास नैयायिक एकमात्र …
