Post Views: 19सर्वेश्वर श्रीरघुनाथ मन्दिर जगद्गुरु श्रीरामानन्दाचार्यपीठ, नक्की लेक, सिरोही, राजस्थान की मुख्य गादी से श्रीमहंत आचार्य सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य जी महाराज के द्वारा पदकृत्य …
Category: न्याय दर्शन
Post Views: 19आत्मनिष्ठ मंगल और आकाशनिष्ठ समाप्ति में कार्य-कारण भाव कैसे? Mangal Aur Granth Ki Samapti भगवत्स्मरण रूप मंगल आत्मा में है। तो वह आकाशनिष्ठ चरमवर्णध्वंसरूपिणी …
Post Views: 267 किसी वाक्य के विपरीत अर्थ की कल्पना करके प्रयोक्ता के वाक्य का विरोध छल कहा जाता है– “वचनविघातोSर्थविकल्पोपत्त्या छलम् “–न्यायदर्शन, अध्याय-१, आह्निक-२, सूत्र-१०, …
Post Views: 141 Acharya Siyaramdas Naiyayik
Post Views: 102नैयायिकों ने अन्धकार के दशम द्रव्यत्व का खण्डन किया है । उनकी अन्तिम युक्ति है कि तम में यद्यपि कालारूप दिखता है चलनक्रिया …
Post Views: 77समाप्त पुनरातत्व काव्य का दोष है | साहित्य दर्पणकार ने ” नाशयन्तो घनध्वान्तं तापयन्तो वियोगिनः | पतन्ति शशिनः पादाः भासयन्तः क्षमातलम् “|| श्लोक …
