श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय का मूल पाठ

Post Views: 27 श्रीमद्भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय, मोह ग्रस्त अर्जुन को भगवान् द्वारा आत्मा की नित्यता का उपदेश Shrimad Bhagvad geeta Ka Dvitiya Adhyaya Acharya …

प्रो• कमलाकान्त जी के स्वाचार्यविषयक भ्रमभूधर का भंग, समीक्षा भाग-४

Post Views: 17 स्वसम्प्रदायाचार्यविषयकभ्रमभूधरभंग भ्रमभूधरभंगकर्ता- आचार्य सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य  श्रीलोकाचार्य जी ने साक्षात् आचार्य को परिभाषित करने के लिए यह सूत्र लिखा है- ‘साक्षादाचार्य इत्युच्यते …

एकादशमुखिहनुमत्कवचम् रुद्रयामलोक्तम् की पाण्डुलिपि

Post Views: 19 https://in.docworkspace.com/d/sIDWmmIPPAb_r56QG?sa=601.1074 https://in.docworkspace.com/d/sIOummIPPAauo-ccG?sa=601.1074 एकादशमुखिहनुमत्कवचम् रुद्रयामलोक्तम् की पाण्डुलिपियां  Acharya Siyaramdas Naiyayik

ब्रह्माण्ड महापुराण के रामवर्म की पाण्डुलिपि

Post Views: 31 https://in.docworkspace.com/d/sIAqmmIPPAePUmKoG?sa=601.1074 यह रामवर्म अतिगोपनीय है। इसके पाठ से आशातीत लाभ होता है। विना विधि जाने किया हुआ पाठ अधिक लाभ नहीं दे …

लघुसिद्धांतकौमुदी, भ्वादिप्रकरण, तिङादि प्रत्याहार परस्मैपद आत्मनेपद सार्वधातुकादि संज्ञाओं का निरूपण    

Post Views: 8 लघुसिद्धांतकौमुदी, भ्वादिप्रकरण, तिङादि प्रत्याहार परस्मैपद आत्मनेपद सार्वधातुकादि संज्ञाओं का निरूपण      Acharya Siyaramdas Naiyayik

शास्त्रार्थ:– लक्षणस्य किं लक्षणम्? अव्याप्त्यतिव्याप्त्यसम्भवलक्षणपरिष्कार:।

Post Views: 28 https://youtu.be/CKFs_aiSrNQ?si=aaectCc1k2bnoqNQ शास्त्रार्थ:– लक्षणस्य किं लक्षणम्? अव्याप्त्यतिव्याप्त्यसम्भवलक्षणपरिष्कार:। पूर्वपक्षोत्तरपक्षौ। Acharya Siyaramdas Naiyayik

हरिनारायण तिवारी की वेदार्थविषयक भ्रान्ति का निराकरण

Post Views: 30 इस वीडियो में हरिनारायण तिवारी के ” एतया निषादस्थपतिं याजयेत्” इस श्रौतवचन में अर्थविषयक महाभ्रम का ढंग किया गया है। Acharya Siyaramdas …

महाश्रीमन्त्रविषयकभ्रमभूधरभंग,समीक्षा-भाग-३

Post Views: 20 आक्षेप श्रीमान् नैयायिक जी ने अपने लेख में चौदह या पन्द्रह बार ‘नारायणमन्त्र’ के ऊपर आक्षेप करने के लिए नारायणमन्त्र कहा है …

श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा”भाग-२

Post Views: 19 श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा” लेख की आपत्तियां पूर्ववत् गर्ज रही हैं। श्रीरामानुजीय विद्वान् प्रो•श्रीकमलाकान्त त्रिपाठी जी के लेख …

व्यासासन ब्रह्मासन अर्थात् ब्राह्मण का आसन है, शूद्रों का नहीं, सूत ,व्यास, वाल्मीकि ब्राह्मण हैं ।

Post Views: 85 व्यासासन ब्रह्मासन अर्थात् ब्राह्मण का आसन है, शूद्रों का नहीं, सूत ,व्यास, वाल्मीकि ब्राह्मण हैं । Vyasasan Brahmasan Arthat Brahmano ka Aasan …