सूत जी यज्ञकुण्ड से समुत्पन्न होने के कारण शूद्र नहीं थे । अग्नि को वेदों में ब्राह्मण कहा गया है । अतएव अग्नि से समुत्पन्न सूत जी ब्राह्मण थे। इसलिए उनके वध से बलराम जी को ब्रह्महत्या का प्रायश्चित करना पड़ा ।
यहां यह पक्ष सटीक तर्क से शास्त्र प्रमाण द्वारा सिद्ध किया गया है कि जाति जन्मना ही होती है कर्मणा नहीं । अतएव आसुर कर्म करने पर भी वृत्त्र अग्निरूपी ब्राह्मण से उत्पन्न होने के कारण ब्राह्मण ही हुआ । फलत: इन्द्र को ब्रह्महत्या लगी । इस विषय में अनेकानेक शंकाओं को उठाकर उनका शास्त्रीय समाधान किया गया है।
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- जय श्रीसीताराम
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