हनुमान जी की उपासना से प्रमुख देवों की उपासना स्वयं सिद्ध
अगस्त्यसंहिता के अनुसार हनुमान् जी का एकादशमुखस्वरूप –आचार्य सियारामदास नैयायिक
एकमात्र हनुमान् जी की उपासना से ही सभी प्रधान देवों की उपासना सम्पन्न हो जाती है ।
यद्यपि इनका प्रधानरूप वानररूप है ही । तथापि इनके अन्य स्वरूप शास्त्रो मे वर्णित है ।
जैसे –
परशुराम,
नरसिंह,
गणेश,
गरुड,
भैरव,
वराह,
शिव,
हयग्रीव,
शेषनाग
और
श्रीराम ।
देखें –
आपादमस्तकं पातु रामदूतो महाबलः । पूर्वे वानरवक्त्रो मामाग्नेय्यां क्षत्रियान्तकृत् ।।
दक्षिणे नारसिंहस्तु नैऋत्यां गणनायकः । वारुण्यां दिशि मामव्यात् खगवक्त्रो हरीश्वरः ।।
वायव्यां भैरवमुखः कौबेर्यां पातु मां सदा । क्रोडास्यः पातु मां नित्यमीशान्यां रुद्ररूपधृक्।।
ऊर्ध्वं हयाननः पातु त्वधः शेषमुखस्तथा । रामास्यः पातु सर्वत्र सौम्यरूपी महाभुजः ।।
यह अंश अगस्त्यसंहिता के एकादशमुखकवच का भागविशेष है।
इन मन्त्रो से दिग्बन्धन भी किया जा सकता है । ऐसी स्थिति मे कोई भी मारक शक्ति साधक पर अपना प्रभाव नही
डाल सकती |
जय जय एकादशमुख हनुमान
#आचार्यसियारामदासनैयायिक

Gaurav Sharma, Haridwar
