Post Views: 77समाप्त पुनरातत्व काव्य का दोष है | साहित्य दर्पणकार ने ” नाशयन्तो घनध्वान्तं तापयन्तो वियोगिनः | पतन्ति शशिनः पादाः भासयन्तः क्षमातलम् “|| श्लोक …
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