अध्याय –५५, रुद्रह्रद तीर्थ का माहात्म्य

Post Views: 18  ॥ पुलस्त्य उवाच ॥  महर्षि पुलस्त्य बोले–  ॥ ततो गच्छेन्नृपश्रेष्ठ पुण्यं रुद्रह्रदं शुभम् ॥  यत्र स्नातो नरो भक्त्या गणाधीशत्वमाप्नुयात् ॥१॥ हे महाराज! …