स्वज्ञप्त्यधीनज्ञप्त्यधीनज्ञप्तिकत्वम् अन्योन्याश्रयत्वम्।
स्वपद से हलन्त्यम् को पकड़ें। हलन्त्यम् ज्ञप्ति के अधीन ज्ञप्ति आदिरन्त्येन सहेता की है। और पुनः उसकी ज्ञप्ति के अधीन ज्ञप्ति हलन्त्यम् की है। इस प्रकार “स्वज्ञप्त्यधीनज्ञप्त्यधीनज्ञप्तिकत्वरूप” अन्योन्याश्रयत्व हलन्त्यम् में चला गया।
इसी प्रकार स्वपद से आदिरन्त्येन सहेता को पकड़कर तद् ज्ञप्ति के अधीन ज्ञप्ति हलन्त्यम् की है । पुनः हलन्त्यम् की ज्ञप्ति के अधीन ज्ञप्ति
आदिरन्त्येन सहेता की है। इस प्रकार “स्वज्ञप्त्यधीनज्ञप्त्यधीनज्ञप्तिकत्वरूप” अन्योन्याश्रयत्व आदिरन्त्येन सहेता में चला गया।
इस प्रकार -” स्वज्ञप्त्यधीनज्ञप्त्यधीनज्ञप्तिकत्वरूप अन्योन्याश्रयत्व” दोनों सूत्रों में समापतित होता है।
-#आचार्यसियारामदासनैयायिक

