अक्षत ( चावल ) से विष्णु भगवान् ( शालग्राम ) और तुलसी से गणेश जी की पूजा न करें ।
दूर्वा से भगवती की और बिल्वपत्र से भगवान् सूर्य की अर्चना न करे —
“नाक्षतैरर्चयेद्विष्णुं न तुलस्या गणाधिपम् । न दूर्वया यजेद् देवीं बिल्वपत्रैर्न भास्करम् । । –मन्त्रमहोदधि,
अक्षत, मंदार और धतूरा भी भगवान् विष्णु को समर्पित न करे–
“अक्षतानर्कधत्तूरौ विष्णौ नार्पयेत् सुधीः । –आह्निकतत्त्व,
बन्धूक,केतकी कुन्द जैसे पुष्प भगवान् शिव को समर्पित न करें । –आह्निक तत्त्व ।
#आचार्यसियारामदासनैयायिक—

