श्री रामानन्द संप्रदाय में श्रीराम मंत्रराज की परंपरा अविच्छिन्न रूप से चली आ रही है । राम मंत्र के आदि उपदेष्टा भगवान श्रीराम हैं। उनसे प्रचलित षडक्षर राम मंत्र का जप श्रीरामानंद संप्रदाय में अक्षुण्ण रूप से चला आ रहा है । इसमें न्यास विनियोग दिग् बंधन, ध्यान, प्राणायाम आदि किस प्रकार करना चाहिए । इन सभी जिज्ञासाओं का उत्तर प्रयोगात्मक रूप में करके दिया गया है ।
साधकों के अनुरोध से यह वीडियो प्रस्तुत किया गया है । इस प्रकार की प्रक्रिया से हम प्रतिदिन राम मंत्र का जप कर सकते हैं । यदि हम प्रतिदिन 6000 राम मंत्र का जप करें तो इसके 6 लाख पुरश्चरण को भी 100 दिन में संपन्न कर सकते हैं ।
यह मंत्र मोक्ष प्रद है । साधकों को ऐहिक फल की प्राप्ति के लिए हनुमान जी का ही स्मरण करना चाहिए । जय श्रीराम
#आचार्यसियारामदासनैयायिक

