Post Views: 195 श्रीसूक्त मन्त्र -६ ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः । तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥6॥ आदित्यवर्णे -हे सूर्य के सदृश कान्ति …
Month: April 2019
Post Views: 94 श्रीसूक्त मन्त्र-५ ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् | तां पद्मनीमीं शरणमहं प्रपद्ये अलक्षमीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ||५|| व्याख्या—चतुर्थ ऋचा …
Post Views: 75 श्रीसूक्त मन्त्र-४ की विशद हिन्दी व्याख्या ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारमार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् | पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ||४|| …
Post Views: 76 श्रीसूक्त: मन्त्र-3 की व्याख्या अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् | श्रियं देवीमुह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ||३|| अन्वय–अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् श्रियं देवीम् उपह्वये ,श्रीः …
Post Views: 179 श्रीसूक्त : मन्त्र-2 की व्याख्या ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥2॥ अन्वय-जातवेदः ! तां अनपगामिनीं …
Post Views: 350 श्रीसूक्त, मन्त्र-1 ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥1॥ अन्वय- हे जातवेदः हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् चन्द्रां …
Post Views: 189 श्रीसूक्त – भूमिका यह सूक्त 15 ऋचाओं का है । इसके पाठ एवं सविधि हवन से धन,सम्पत्ति की प्राप्ति के साथ ही श्रीसूक्त …
Post Views: 336 ब्रह्मदण्ड ब्रह्मदण्ड की चर्चा श्रीमद्वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड 56वें सर्ग में आयी है कि विश्वामित्र के आग्नेय पाशुपत आदि अस्त्रों यहां तक …
Post Views: 46 कालयवन से भगवान् कृष्ण की रणविमुखता में कारण- सर्वसमर्थ भगवान् श्रीकृष्ण कालयवन से युद्ध न करके क्यों भगे ? इस प्रश्न का …
Post Views: 194 गौ- घृत से अद्भुत लाभ हम अगर गोरस का बखान करते करते मर जाए तो भी कुछ अंग्रेजी सभ्यता वाले हमारी बात …
Post Views: 570 रुक्मिणी जी का प्रेमपत्र रुक्मिणी जी ने भगवान् श्रीकृष्ण को एक प्रेमपत्र भेजा जिसकी चर्चा भागवत दशम स्कन्ध में है । यदि …
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Post Views: 231 राम नाम विष्णुसहस्रनाम के समान फलप्रद कैसे ? भगवान् राम के ” राम ” नाम को विष्णुसहस्रनाम के तुल्य कहा गया है …
Post Views: 111 जाति जन्मना ही है ,कर्मणा नही–शास्त्रीय प्रमाण वृत्रासुर यदि असुर था तो उसे मारने पर देवेन्द्र को ब्रह्म ह्त्या क्यों लगी ? …
