सुपत्नी और कुपत्नी के लक्षण

पतिघ्नी दुष्ट भार्या सा या सदा कटुभाषिणी।

कुम्भीपाकं चिरं भुङ्क्त्वा जायते कुक्कुरी तत:।।९।।

 

पति का हनन करने वाली दुष्ट भार्या वह है जो सदा कटु वचन बोलती रहती है। चिरकालपर्यंत कुम्भीपाक रूपी नरक भोगकर वह कुक्कुरी बनती है। अर्थात् कुतिया बनकर जन्म लेती है।।

 

भौं भौं सा बुक्कति सर्वं सर्वदा कलहप्रिया।

लक्षणेन सुविज्ञेया कुक्कुरी कामरूपिणी।।१०।।

 

 

 

तत्पश्चात् वह सभी को देखकर भौं भौं करती रहती है।और उसे सर्वदा कलह=झगड़ा ही अच्छा लगता है।

इस लक्षण के अनुसार अपने रूपों को बदलने वाली उस कुक्कुरी को पहचान लेना चाहिए।।

 

सुशीलाSकोपना साध्वी सर्वदा मधुभाषिणी।

सुपत्नी या पतिप्राणा वन्दनीया सदा बुधै:।।११।।

 

सुंदर पत्नी वह है जो सुशील, क्रोधरहित,साध्वी, मधुवत् मधुर वचन बोलने वाली हो। जिसके प्राण पति में बसते हों। ऐसी नारी विद्वानों द्वारा वन्दनीय है।।

 

 

सरस्वती रमा तूमा देव्यस्तस्यां सुसंस्थिता: ।

यद्गृहे वर्तते सैषा तत्र स्वर्गो निरर्थक: ।।१२।।

 

भगवती सरस्वती,लक्ष्मी जी और पार्वती जैसी देवियां उस नारी में सदा विराजमान रहती हैं। ऐसी नारी जिस घर में है । वहां स्वर्ग का कोई प्रयोजन नहीं ।। 

 

–#आचार्यसियारामदासनैयायिक

 

 

 

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