Post Views: 29 भगवान् कृष्णद्वैपायन व्यास महर्षि परासर के द्वारा माँ सत्यवती से उत्पन्न हुए | इन्हें शास्त्रनाभिज्ञ कुछ लोग शूद्र कहते हैं | उनका …
Category: ऋषि मुनि
Post Views: 30 पुत्रहीनश्च यो मर्त्यो नारी वापि समाहिता ॥ तन्मनाः पिंडदानं वै तथा स्नानं करिष्यति ॥ अपुत्रो लभते शीघ्रं सुपुत्रं नात्र संशयः ॥ १७१ …
Post Views: 293 “भ्रातृद्वितीया अर्थात् भैयादूज से नारी विधवा नहीं होती और भाई की आयु बढ़ती है “ भ्रातृद्वितीया– अर्थ–भ्रातृमङ्गलार्था भ्रातृभोजनार्था वा द्वितीया इति भ्रातृद्वितीया …
Post Views: 1,061 वेदों में मूर्तिपूजा का सप्रमाणविवेचन ऋग्वेद के अष्टम मण्डल में मूर्तिपूजा का उल्लेख इस प्रकार हुआ है- “अर्चत प्रार्चत प्रियमेधासो अर्चत । …
Post Views: 148 Acharya Siyaramdas Naiyayik
Post Views: 61 गुरुपूर्णिमा गुरु का महत्त्व और गुरु को पाप , हमारे शास्त्रों में गुरु के महत्त्व को बतलाते हुए कहा गया है कि …
Post Views: 2,514 एक सिद्ध योगी थे । अपनी सिद्धियों के द्वारा अनेक कार्य शीघ्र सम्पन्न कर देते थे । किन्तु उन्हें अपने हृदय में …
Post Views: 149 -भगवान् कृष्णद्वैपायन व्यास महर्षि परासर के द्वारा माँ सत्यवती से उत्पन्न हुए | इन्हें शास्त्रनाभिज्ञ कुछ लोग शूद्र कहते हैं | उनका …
