आत्मनिष्ठ मंगल और आकाशनिष्ठ समाप्ति में कार्य-कारण भाव कैसे?
Mangal Aur Granth Ki Samapti
भगवत्स्मरण रूप मंगल आत्मा में है। तो वह आकाशनिष्ठ चरमवर्णध्वंसरूपिणी ग्रन्थसमाप्ति का कारण कैसे बन सकता है?
कार्य-कारण भाव की उपपत्ति हेतु कार्य के अधिकरण में कारण का होना अनिवार्य है।
-#आचार्यसियारामदासनैयायिक

