Post Views: 190 होलिकारमणी दिव्या अर्बुदे वीक्ष्य राघवम् । चुम्बति चाथ मा मैवं भाषते चारुहासिनी ।। होलिकारूपिणी दिव्य रमणी अर्बुदाचल( माउंट आबू ) में षोडश …
Category: श्री राम जी
Post Views: 261 भगवानरामसृष्टिकेकण–कणमेंसमाएहैं।हरविज्ञान, विद्याऔरकलामेंउनकीहीमौजूदगीहै।गणितभीऐसाहीएकविषयहै।वास्तवमेंगणितसत्यकीखोजपरआधारितज्ञानकीशाखाहै।गणितमेंमनुष्यसत्यकोतलाशताहैऔरदुनियामेंपरमसत्यको।सत्यऔरपरमसत्यतोश्रीरामहीहैं।एकरोचकगणितीयपहेलीबतातीहैकिहरनाममेंश्रीरामसमाएहैंऔरयहबातसिद्धभीकीजासकतीहै।यहसांकेतिकरूपसेकहतीहै– नामकेअक्षरवेदगुनेकरिफेरिजतनसोंतत्वमिलावे।तत्वमिलायकेदूनेकरेफिरवामेवसुकोभागलगावे।भागलगायजोशेषबचेदोहरनाममेंरामकोवासबतावे।जिसकेनिशिदनजापकरनतेमनुआंमनवांछितफलपावे।अर्थआपकोईभीनामलें।मानाआपनेनामलिया– दीपक।नामकेपूर्णअक्षरलें।दीपकमें3 अक्षरहैं।इस3 कावेदगुनायानीचारगुनाकरें।चारगुना12 हुआ।अबइसमें5 तत्वमिलाएं।इसकायोग17 हुआ।तत्वमिलाकरदूनेकरें।अबइसकामान34 होगा।फिरइसमेंवसुयानी8 काभागलगाएं। 8 का34 मेंभागदेनेपर2 बचतेहैं।ये2 अक्षरभगवानरामकाप्रतीकहैं।इसप्रकारआपकिसीभीनामकेपूर्णअक्षरलेकरदेखें, सबमेंआपकोभगवानरामकेदर्शनहोंगे। केएलविजय Acharya Siyaramdas Naiyayik
Post Views: 598 लंका में श्रीराम का युद्धारम्भ एवं युद्धदिवस की गणना लंका में श्रीराम ने युद्ध कब आरम्भ किया और कितने दिन चला ? …
Post Views: 114 सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते । अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम ।। …
Post Views: 161 मुक्तों से प्राप्य प्रभु के दिव्य धाम का उल्लेख “यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम” (जहाँ जाकर प्राणी नहीं लौटता वही मेरा …
Post Views: 53 जब सुग्रीव दूसरी बार बालि से युद्ध करने गए तो उनकी भीषण गर्जना से क्रुद्ध शक्रसुत युद्ध हेतु निकला | उस समय …
Post Views: 80 भगवान् श्रीराम शूर्पणखा से विवाहित लक्ष्मण जी को कुआंरा क्यों कहे ? शूर्पणखा भगवान् राम के पास प्रणय याचना करने आयी और …
Post Views: 25 दीपावली पर दीपकों द्वारा श्रीराम के स्वागत हेतु चन्द्र का प्रतिनिधित्व आज के ही दिन श्रीराम राक्षसी अत्याचारों का समूल विनाश करके …
Post Views: 252 ||अथ श्रीरामसर्वस्वस्तोत्रं प्रारभ्यते || रामो माता मत्पितारामचन्द्रो भ्राता रामो मत्सखा रामचन्द्रः । रामः स्वामी राम एवार्थदाता रामादन्यं नैव जाने न जाने ॥ …
Post Views: 67 बालकरूप भगवान् के स्वरूप का ध्यान अतिलाभप्रद है; क्योंकि ध्येय के गुण ध्याता में आते हैं । और शिशु स्वयं निर्मल होता है । …
