अध्याय-५३, ब्रह्मपद के प्राकट्य का माहात्म्य

Post Views: 27 ॥ पुलस्त्य उवाच ॥  महर्षि पुलस्त्य बोले–   ॥ ततो गच्छेद् ब्रह्मपदं तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् ।।  यत्र पूर्वं पदं न्यस्तं ब्रह्मणा लोककारिणा ॥ …