“श्रीशिवाय नमस्तुभ्यम्” मन्त्र में प्रमाण
श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं मुखं व्याहरते यदा ।
तन्मुखं पावन तीर्थं सर्वपापविनाशनम्।।
— शिवमहापुराण, विश्वेश्वरसंहिता–23-7
“श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं” जब मुख उच्चारण करता है। तब वह मुख संपूर्ण पापों का विनाशक पवित्र तीर्थ बन जाता है।।-1/23/7
तन्मुखञ्च तथा यो वै पश्यति प्रीतिमान्नर: ।
तीर्थजन्य फलं तस्य भवतीति सुनिश्चितम्।।
-1/23/8
इसी प्रकार जो भक्तिमान् मानव उस मुख का दर्शन करता है। उसे तीर्थों से मिलने वाला फल प्राप्त होता है। यह सुनिश्चित है।– शिवमहापुराण-1/23/8

