मथ्नामि कौरवशतं समरे न कोपाद्
दुःशासनस्य रुधिरं न पिबाम्युरस्तः ।
संचूर्णयामि गदया न सुयोधनोरू
सन्धि करोतु भवतां नृपतिः पणेन ॥१५॥
— वेणीसंहारम्- प्रथम अंक/१५
समरे= रणभूमि में, कौरवशतं= १०० कौरवों का, कोपाद्=क्रोध से,न मथ्नामि= विमर्दन न करूं।
दु:शासनस्य= दु:शासन के, हृदय को विदीर्ण करके उसके, उरस्त:= वक्षस्थल के, रुधिरं= रक्त का, न पिबामि= पान न करूं।और ,गदया= अपनी भीषण गदा से, सुयोधनस्य= दुर्योधन की, ऊरू= जांघ को, न सञ्चूर्णयामि= पूर्णतया चूर्ण न कर डालूं । अर्थात् कौरवों का विध्वंस,दु: शासन की छाती का रक्तपान मैं करूंगा ही। साथ ही दुर्योधन की जांघ भी मैं तोड़ूंगा।
भले ही, भवतां=आप सबके, नृपति:= महाराज श्रीयुधिष्ठिर जी, पणेन= पांच ग्राम रूपी मूल्य से (लेकर) सन्धिं= संधि ही, करोतु= क्यों न कर लें।
कौरवशतं= कौ= पृथिव्यां रवा:= शब्दा: येषां ते कौरवा:, युधिष्ठिरादिवत् सप्तम्या अलुक्। तेषां शतं=कौरवशतं, जो भारत भूभाग में मतदान के समय मिथ्या प्रचार रूपी कोलाहल करने वाले कुनेता हैं। उन सैकड़ों नेताओं का मतदान रूपी रणभूमि में विमर्दन नहीं करूंगा! अर्थात् करूंगा ही।
दु:शासनस्य= भ्रष्टाचारात्मक शासन का हृदय विदीर्ण करके उसके, उरस्त:= वक्षस्थल अर्थात् मार्मिक स्थानों का, रुधिरं= अव्यवस्था रूपी रक्त का, न पिबामि=
पान नहीं करूंगा। अर्थात् करूंगा ही।
बड़े बड़े प्रलोभन रूपी कपट द्वारा, सुयोधनस्य= केवल देखने मैं सुंदर युद्ध करने वाले अर्थात् चुनाव लडने वाले कुत्सित नेताओं के, ऊरू= लोकप्रियतारूपी रूपी जांघ को, गदया= विपक्षियों को पीड़ा देने वाली व्यवस्था से,
न संचूर्णयामि= चूर्ण चूर्ण नहीं कर डालूंगा। अर्थात् करूंगा ही।
भवतां= आप सबके, नृपति: = राजा के समान स्वयं को समझने वाले अयोग्य नेता परेता आदि, पणेन= चुनाव में मतसंग्रह रूपी मूल्य से, भले ही, सन्धिं= सन्धि, करोतु = क्यों न कर लें।
वर्तमान में पहलगांव के आतंकी हमले पर सभी पार्टियों के नेता वोटबैंक बढ़ाने के उद्देश्य से पाकिस्तान के समर्थन में लगकर हिंदुओं का गला घोंटने पर उतारू हैं। इनकी जांघ भीमसेन रूपी हिंदू ही तोड़ेगे।
जय श्रीराम।
#आचार्यसियारामदासनैयायिक

