अर्थविचार सहित नाम जप से लाभ, अजामिलोपाख्यान

Post Views: 21 श्रीमद्भागवत कथा के इस प्राचीनबर्हि और देवर्षि नारद के संवाद में प्रसंगत: अर्थविचार सहित नाम जप से विशेष लाभ का वर्णन किया …

कमलाकान्त त्रिपाठी जी के आक्षेप का खण्डन भाग-१

Post Views: 25 श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा” लेख की आपत्तियां पूर्ववत् गर्ज रही हैं।   https://www.facebook.com/share/p/uRsSTzyQUXfMLVqB/?mibextid=qi2Omg   श्रीरामानुजीय विद्वान् प्रो•श्रीकमलाकान्त त्रिपाठी …

श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा

Post Views: 55 श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा श्रीमज्जगद्गुरवे रामानन्दाचार्याय नम: रामानुज संप्रदाय के मान्य ग्रन्थ श्रीवचनभूषणम् के भाष्य में भगवान् श्रीराम …

षडक्षर राममन्त्रराज की प्रयोगात्मक जप विधि

Post Views: 65 श्री रामानन्द संप्रदाय में श्रीराम मंत्रराज की परंपरा अविच्छिन्न रूप से चली आ रही है । राम मंत्र के आदि उपदेष्टा भगवान …

निग्रहाचार्य भागवतानंद की भ्रांति एवम् उनके अज्ञानमूलक आक्षेपों का खण्डन

Post Views: 6   सर्वेश्वरश्रीरघुनाथो विजयतेतराम् निग्रहाचार्य जी की भ्रान्ति एवम् उनके अज्ञानमूलक आक्षेपों का खण्डन Nigrahacharya Ji Ki Bhranti Evam Unke Agyanmulak Akshepon Ka …

श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय का शुद्ध उच्चारण

Post Views: 12 पाठशुद्धिहेतु श्रवण । श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय का पाठ करने एवं सुनने तथा शुद्ध पाठ हेतु मूलपाठ सुनें। Acharya Siyaramdas Naiyayik

पण्डितम्मन्य हरिनारायण तिवारी के प्रश्नों एवम् आक्षेपों का मुंहतोड़ उत्तर

Post Views: 19 प्रो• हरिनारायण तिवारी ने ” एतया निषादस्थपतिं याजयेत्” इस श्रुतिवाक्य को लेकर जिस अमर्यादित भाषा में प्रश्न तथा आक्षेप किया है। उसका …

गुणों के अर्जन से दुर्लभ स्थान भी प्राप्त कर सकते हैं

Post Views: 6 मृच्छकटिकम्   गुणेषु यत्नः पुरुषेण कार्यो  न किञ्चिदप्राप्यतमं गुणानाम् ||  गुणप्रकर्षादुडुपेन शम्भो रलङ्घ्यमुल्लङ्घितमुत्तमाङ्गम्।   पुरुषेण=जनेन, गुणेषु=दयादाक्षिण्यादिगुणोपार्जनेषु,यत्न:= प्रयत्न:, कार्य:=करणीय:, गुणानाम्= गुणयुक्तजनानां, किञ्चिदपि वस्तु, …

“श्रीशिवाय नमस्तुभ्यम्” मन्त्र में प्रमाण

Post Views: 113 “श्रीशिवाय नमस्तुभ्यम्” मन्त्र में प्रमाण श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं मुखं व्याहरते यदा । तन्मुखं पावन तीर्थं सर्वपापविनाशनम्।। — शिवमहापुराण, विश्वेश्वरसंहिता–23-7 “श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं” जब मुख …