संध्या और ब्रह्मगायत्री की जपसंख्या का सप्रमाणविवेचन

Post Views: 345स्नान करने के पश्चात् द्विज को समयानुसार संध्या में प्रवृत्त होना चाहिए । सन्ध्या नित्य कर्म है । यदि समय स्वल्प हो तो …

समाप्तपुनरातत्त्व दोष

Post Views: 87समाप्त पुनरातत्व काव्य का दोष है | साहित्य दर्पणकार ने ” नाशयन्तो घनध्वान्तं तापयन्तो वियोगिनः | पतन्ति शशिनः पादाः भासयन्तः क्षमातलम् “|| श्लोक …

तारा द्वारा बालि के समक्ष श्रीराम के तेज और बल का वर्णन

Post Views: 75 जब सुग्रीव दूसरी बार बालि से युद्ध करने गए तो उनकी भीषण गर्जना से क्रुद्ध शक्रसुत युद्ध हेतु निकला | उस समय …

धर्म और सम्प्रदाय

Post Views: 66  धर्म उसे कहते हैं जिससे किसी समाज राष्ट्र या समग्र विश्व को धारण किया जाता है –धरति मानवं –समाजं-राष्ट्रं –समग्रं विश्वं वा …

हे प्रलयंकर रघुवर किंकर

Post Views: 205हे आंजनेय हे पवनपुत्र हे महाबली करुणानिधान । हे अक्षविजेता महाशूर हे महादेव शतकोटि भान ।। हे प्रलयंकर रघुवरकिंकर हे महातेज गन्धर्वगान । …