Post Views: 31 कर्म 2 प्रकार के होते हैँ सामान्य और विशेष । सामान्य कर्म मे वे हैँ जो प्रत्येक वर्ण एवम् आश्रम के लिए …
Author: Acharya Siyaramdas Naiyayik
Post Views: 104 अक्षत ( चावल ) से विष्णु भगवान् ( शालग्राम ) और तुलसी से गणेश जी की पूजा न करें । दूर्वा से …
Post Views: 525 🌺🌹ओम् नमो भगवते बजरंग वीर लोहे की गदा वज्र का सोंटा तेल सिंदूर की पूजा सवा मन का रोट माता जानकी जी …
Post Views: 315 स्नान करने के पश्चात् द्विज को समयानुसार संध्या में प्रवृत्त होना चाहिए । सन्ध्या नित्य कर्म है । यदि समय स्वल्प हो …
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Post Views: 75 समाप्त पुनरातत्व काव्य का दोष है | साहित्य दर्पणकार ने ” नाशयन्तो घनध्वान्तं तापयन्तो वियोगिनः | पतन्ति शशिनः पादाः भासयन्तः क्षमातलम् “|| …
Post Views: 66 जब सुग्रीव दूसरी बार बालि से युद्ध करने गए तो उनकी भीषण गर्जना से क्रुद्ध शक्रसुत युद्ध हेतु निकला | उस समय …
Post Views: 199 अर्थवाद –जिन वाक्यों के द्वारा विधेय वस्तु की स्तुति की जाती है | उन्हें अर्थवाद कहा जाता है | ये वाक्य ३ …
Post Views: 62 धर्म उसे कहते हैं जिससे किसी समाज राष्ट्र या समग्र विश्व को धारण किया जाता है –धरति मानवं –समाजं-राष्ट्रं –समग्रं विश्वं …
Post Views: 187 हे आंजनेय हे पवनपुत्र हे महाबली करुणानिधान । हे अक्षविजेता महाशूर हे महादेव शतकोटि भान ।। हे प्रलयंकर रघुवरकिंकर हे महातेज गन्धर्वगान …
Post Views: 54 जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने १००० अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने का आदेश …
