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Author: Acharya Siyaramdas Naiyayik
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Post Views: 68 नारी का क्या महत्त्व है यह आज का मानव भूल गया है ,किसी की मर्यादा कोई मर्यादित व्यक्ति ही समझ सकता है …
Post Views: 220 किसी वाक्य के विपरीत अर्थ की कल्पना करके प्रयोक्ता के वाक्य का विरोध छल कहा जाता है– “वचनविघातोSर्थविकल्पोपत्त्या छलम् “–न्यायदर्शन, अध्याय-१, आह्निक-२, …
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Post Views: 172 मुक्तों से प्राप्य प्रभु के दिव्य धाम का उल्लेख “यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम” (जहाँ जाकर प्राणी नहीं लौटता वही मेरा …
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Post Views: 74 सभी पवित्रतायें व्यर्थ हैं यदि धन का उपार्जन शुद्धता से नहीं किया गया — “सर्वेषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम् । योSर्थे शुचिर्हि स …
Post Views: 1,018 सप्तशती पाठ कैसे करें ? क्योंकि वह कीलित है । –यहाँ जो विशेष ग्रन्थ और साधकों के अनुभव हैं–उनके आधार पर लिखा …
Post Views: 159 विप्र–मौलवी और पादरी साहब आप दोनों तो खुदा और ईशा से मिलने गये थे । यहां थे ही नहीं । तो मैं …
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Post Views: 63 गुरुपूर्णिमा गुरु का महत्त्व और गुरु को पाप , हमारे शास्त्रों में गुरु के महत्त्व को बतलाते हुए कहा गया है कि …
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