छल एवम् उसके भेद–वाक्छल, सामान्य छल और उपचारच्छल

Post Views: 220  किसी वाक्य के विपरीत  अर्थ  की कल्पना करके प्रयोक्ता के वाक्य का विरोध छल कहा जाता है– “वचनविघातोSर्थविकल्पोपत्त्या छलम् “–न्यायदर्शन, अध्याय-१, आह्निक-२, …

भगवान् का धाम या नित्यविभूति

Post Views: 172 मुक्तों से प्राप्य प्रभु के दिव्य धाम का उल्लेख “यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम” (जहाँ जाकर प्राणी नहीं लौटता वही मेरा …

धर्मशास्त्र- शौच एवं धनशुद्धि

Post Views: 74 सभी पवित्रतायें व्यर्थ हैं यदि धन का उपार्जन शुद्धता से नहीं किया गया — “सर्वेषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम् । योSर्थे शुचिर्हि स …

दुर्गासप्तशती पाठ की प्रामाणिक परम्परा

Post Views: 1,018 सप्तशती पाठ कैसे करें ? क्योंकि वह कीलित है । –यहाँ जो विशेष ग्रन्थ और साधकों के अनुभव हैं–उनके आधार पर लिखा …

शठ से शठता करना ही उचित है । आप लोग तो खुदा और ईशा से मिलने गये थे ।

Post Views: 159 विप्र–मौलवी और पादरी साहब आप दोनों  तो खुदा और ईशा से मिलने गये थे । यहां थे ही नहीं । तो मैं …