रामनाम की सर्वव्यापकता

Post Views: 276 भगवानरामसृष्टिकेकण–कणमेंसमाएहैं।हरविज्ञान, विद्याऔरकलामेंउनकीहीमौजूदगीहै।गणितभीऐसाहीएकविषयहै।वास्तवमेंगणितसत्यकीखोजपरआधारितज्ञानकीशाखाहै।गणितमेंमनुष्यसत्यकोतलाशताहैऔरदुनियामेंपरमसत्यको।सत्यऔरपरमसत्यतोश्रीरामहीहैं।एकरोचकगणितीयपहेलीबतातीहैकिहरनाममेंश्रीरामसमाएहैंऔरयहबातसिद्धभीकीजासकतीहै।यहसांकेतिकरूपसेकहतीहै– नामकेअक्षरवेदगुनेकरिफेरिजतनसोंतत्वमिलावे।तत्वमिलायकेदूनेकरेफिरवामेवसुकोभागलगावे।भागलगायजोशेषबचेदोहरनाममेंरामकोवासबतावे।जिसकेनिशिदनजापकरनतेमनुआंमनवांछितफलपावे।अर्थआपकोईभीनामलें।मानाआपनेनामलिया– दीपक।नामकेपूर्णअक्षरलें।दीपकमें3 अक्षरहैं।इस3 कावेदगुनायानीचारगुनाकरें।चारगुना12 हुआ।अबइसमें5 तत्वमिलाएं।इसकायोग17 हुआ।तत्वमिलाकरदूनेकरें।अबइसकामान34 होगा।फिरइसमेंवसुयानी8 काभागलगाएं।  8 का34 मेंभागदेनेपर2 बचतेहैं।ये2 अक्षरभगवानरामकाप्रतीकहैं।इसप्रकारआपकिसीभीनामकेपूर्णअक्षरलेकरदेखें, सबमेंआपकोभगवानरामकेदर्शनहोंगे।  केएलविजय Acharya Siyaramdas Naiyayik

शूद्र के कान में पिघला शीसा डालने में शास्त्र का तात्पर्य कथमपि नहीं ।

Post Views: 2,045 लोग आक्षेप करते हैं कि शूद्रों के कान में शीसा पिघलाकर डालने की बात शास्त्रों में क्यों कहीं गयी ?? जहां तक …

लंका में श्रीराम का युद्धारम्भ एवं युद्धदिवस की गणना

Post Views: 671 लंका में श्रीराम का युद्धारम्भ एवं युद्धदिवस की गणना लंका में श्रीराम ने युद्ध कब आरम्भ किया और कितने दिन चला ? …

—सत्संग का दौर्लभ्य और भगवत्प्राप्ति में २अंगुल की कमी—

Post Views: 125 वस्तुस्थिति यही है कि आज के युग में सन्त दुर्लभ हैं । पर भागवत माहात्म्य देखें कि लोकस्रष्टा ब्रह्मा जी के  पुत्र, अव्याहतगति, …

राममन्त्र के पुरश्चरण में अनिवार्य नियम

Post Views: 1,161 राममन्त्र के पुरश्चरण में अनिवार्य नियम  “सनकाद्या मुनयो हनुमन्तं पप्रच्छु: ।—रामकार्यधुरन्धर: ।”–रामरहस्योपनिषद्, चतुर्थ अध्याय सनकादि मुनियों ने हनुमान् जी से राममन्त्रों के …

आञ्जनेय शक्तिपीठम् में प्राणप्रतिष्ठा का प्रथम दिवस

Post Views: 74 आज प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ । जिनमें पंचांग कर्म सम्पन्न हुए ।कुछ छवियाँ अंकित हैं । Acharya Siyaramdas Naiyayik

श्रीसूक्त मन्त्र–८ की हिन्दी व्याख्या एवं पुरश्चरण

Post Views: 338    ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् | अभूतिमसमृद्धिं मे सर्वां निर्णुद मे गृहात् ||8|| व्याख्या—भक्त  को अपने भूख प्यास ,सुखादि-संसाधनों के अभाव को …