नारायण कवचम्

Post Views: 299 भागवतोक्तं सविधि नारायणकवचम् विधि –स्नानादि से निवृत्त होकर उत्तर दिशा में मुख करके बैठ जाय | तत्पश्चात ३ वार आचमन करके आसन …

एकादशमुखिहनुमतकवच में प्रयुक्त ग्रहशब्द के विविध अर्थ और कवच का प्रभाव

Post Views: 298 इस कवच के करन्यास एवं हृदयादिन्यास में “अञ्जनीसुतगर्भाय” और किसी प्रति में “अञ्जनीगर्भाय” पाठ मिलता है । जो अर्थ की दृष्टि से …

श्रीमदाञ्जनेय भुजङ्गप्रयातस्तोत्रम्

Post Views: 294 श्रीमदाञ्जनेय भुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् मनोजवं मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ बुद्दिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वं अरोगता । अजाड्यं वाक्पटुत्वं …

श्रीरामसर्वस्व स्तोत्रम्

Post Views: 275 ||अथ श्रीरामसर्वस्वस्तोत्रं प्रारभ्यते || रामो माता मत्पितारामचन्द्रो भ्राता रामो मत्सखा रामचन्द्रः । रामः स्वामी राम एवार्थदाता रामादन्यं नैव जाने न जाने ॥ …

श्रीमद्भगवद्गीता, द्वितीय अध्याय,श्लोक-४ की व्याख्या

Post Views: 134 अर्जुन उवाच कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं च मधुसूदन ।इषुभि: प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ॥४॥ व्याख्या  – पूर्व में अर्जुन ने कहा था कि इस …

क्या भगवान् कृष्ण ने बालकों के साथ वांये हाथ से भोजन किया था ?

Post Views: 99 आजकल  भागवत के श्लोकों का परम्परया अध्ययन न होने से लोग शास्त्रविरुद्ध अर्थ की कल्पना से अनेक भाव व्यक्त करते रहते हैं …

योग का प्रथम द्वार

Post Views: 145 योग का प्रथम द्वार योगस्य प्रथमं द्वारं वाङ्निरोधोSपरिग्रह: । निराशा च निरीहा च नित्यमेकान्तशीलता ।। –विवेकचूडामणि-३६८ वाणी का निरोध,अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह …

हनुमज्जयन्ती शब्द हनुमज्जन्मोत्सव की अपेक्षा विलक्षणरहस्यगर्भित है

Post Views: 398 आज हनुमज्जयन्ती महोत्सव है । आजकल वाट्सएप्प से ज्ञानवितरण करने वाले एक मूर्खतापूर्ण सन्देश सर्वत्र प्रेषित कर रहे हैं कि हनुमज्यन्ती न …

नागकन्या द्वारा हनुमान् जी की उपासना

Post Views: 106 हनुमत्सहस्रनाम में हनुमान् जी का एक नाम आया है –”नागकन्याभयध्वंसी”=नागकन्या के भय को नष्ट करने वाले मारुति । इससे यह सिद्ध होता …

श्रीमद्भगवद्गीता द्वितीय अध्याय श्लोक-२ की व्याख्या

Post Views: 126 श्रीभगवानुवाच  कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् । अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन ॥२॥  व्याख्या—अर्जुन के मोह का विद्रावक वचन श्रीभगवान् आरम्भ कर रहे हैं । श्रीभगवान्= श्री …

रामपालमोहविद्रावण अनुत्तम-शब्द-विमर्श

Post Views: 45 भगवद्गीता के सातवें अध्याय के १८ वें श्लोक में रामपाल नामक एक महाशय “अनुत्तमां गतिम् ।।” में आये अनुत्तम (अनुत्तमां के पुल्लिंग …