अध्याय -४६,व्यास तीर्थ का माहात्म्य

।।पुलस्त्य उवाच ॥

पुलस्त्य जी बोले–

॥ ततो व्यासेश्वरं गच्छेद्व्यासेन स्थापितं हि यत् ॥
तं दृष्ट्वा जायते मर्त्त्यो मेधावी मतिमाञ्छुचिः ॥ सप्तजन्मान्तराण्येव व्यासस्य वचनं यथा ॥ १ ॥

तत्पश्चात् मानव व्यासेश्वर तीर्थ जाय। जहां भगवान् व्यास से स्थापित शिवलिंग है। जिसके दर्शन मात्र से मनुष्य निष्पाप हो जाता है। इतना ही नहीं। वह सात जन्मों तक मेधावी और विमल मति वाला होता है। ऐसा ही भगवान् व्यास का वचन है।।१।।

इति श्रीस्कांदे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां सप्तमे प्रभासखण्डे तृतीयेऽर्बुदखण्डे व्यासतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम षट्चत्वारिंशोऽध्यायः ॥ ४६ ॥

इस प्रकार 81000 श्लोक वाली श्रीस्कन्द महापुराण रूपी संहिता के सातवें प्रभास खण्ड के तृतीय अर्बुद खण्ड में “व्यासतीर्थ” के माहात्म्य का वर्णन करने वाला ४६ वां अध्याय पूर्ण हुआ

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