आबालगोपविदिता= बालादारभ्यगोपपर्यंतं सर्वै: मूर्खपामरादिजनैर्विदिता। सर्वोपास्येत्यर्थ:।
भगवती त्रिपुरसुन्दरी केवल षोढान्यासादिमर्मज्ञ विद्वानों की ही समाराध्या नहीं हैं अपितु बच्चों से लेकर साधारण गोप अर्थात् गाय चराने वाले चरवाहों से भी विदित हैं। वे सभी आपत्तिग्रस्त होने पर मां का ही स्मरण करते हैं। इसलिए ये त्रैलोक्य जननी भगवती ज्ञानी अज्ञानी सभी प्राणियों की उपास्या हैं। कोई भी इनकी शरण ग्रहण करके संसारसागर से पार जा सकता है। जय श्रीराम

