हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम्, Hanumat Sahasra Name Stotram

हनुमत्सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ से शत्रुनाश, संपत्ति प्राप्ति एवम् परकृत मारण,मोहन, उच्चाटन आदि अभिचार कर्मों का विनाश होता है। एक साधक को इसके पाठ में हनुमान जी महाराज का स्वरूप दिखायी पड़ा था। जो अभी जीवित हैं।

इसका प्रात: मध्याह्न और सायं १-१पाठ करने से ग्रहादिजन्यपीडा की निवृत्ति और आजीविका के विघ्न विध्वस्त होते हैं। साधक में हनुमान जी के प्रति श्रद्धा एवम् आत्मबल बढ़ता है।

विनियोग–
दायें हाथ में जल लेकर पढें–

ॐ अस्य श्रीहनुमत्सहस्रनामस्तोत्रमालामन्त्रस्य । श्रीरामऋषिः  । अनुष्टुप्छन्दः  । हनुमान् ,परमात्मा देवता  ॥ ह्रीं श्रीं ह्रौं ह्रां वीजानि  । श्रीरिति शक्ति:, लंकाविध्वंसन इति कवचं,किलिकिलिबुबुकारेण इति कीलकं मम सर्वोपद्रवशान्त्यर्थे जपे विनियोग:।
पढ़कर जल भूमि या किसी पात्र में डाल दें।

न्यास:–

श्रीरामाय ऋषये नम: शिरसि।अनुष्टुप् छन्दसे नमो मुखे,हनुमत्परमात्मदेवतायै नमो हृदि, ह्रीं श्रीं ह्रौं ह्रां इति बीजेभ्यो नमो गुह्ये,श्रीरिति शक्तये नमः: पादयो:, लंकाविध्वंसन इति कवचायाय हुं स्कन्धयो:, किलिकिलिबुबुकारेण इति कीलकाय नमो हृदि।

इसके बाद करन्यास करें–
 ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। लङ्काविध्वंसनाय तर्जनीभ्यां नमः । अञ्जनीगर्भसंभूताय मध्यमाभ्यां नमः । शाकिनीडाकिनीविध्वंसनाय अनामिकाभ्यां नमः । किलिकिलिबुबुकारेण विभीषणाय हनुमते देवाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं ह्रौं ह्रां ह्रू फट् स्वाहा करतलकरप्ष्टष्ठाभ्यां नमः।

हृदयादिन्यास:–

ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय हृदयाय नमः । लङ्काविध्वंसनाय शिरसे स्वाहा।
अञ्जनीगर्भसंभूताय शिखायै वषट्।
शाकिनीडाकिनीविध्वंसनाय कवचाय हुम् । किलिकिलि बुबुकारेण विभीषणाय हनुमते देवाय नेत्रत्रयाय वौषट् ।

ॐ ह्रीं श्रीं ह्रौं ह्रां ह्रूं अस्त्राय फट् ।

।।अथ ध्यानम् ॥

प्रतप्तस्वर्णवर्णाभं संरक्तारुणलोचनम् ।
सुग्रीवादियुतं ध्यायेत्पीताम्बरसमावृतम् ॥

 गोष्पदीकृतवारीशं पुच्छमस्तकमीश्वरम् ।
 ज्ञानमुद्रां च बिभ्राणं सर्वालङ्कारभूषितम् ॥

 श्रीराम उवाच॥–से हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् का पाठ करें।

हम हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् की PDF का लिंक क नीचे दे रहे हैं,–

https://drive.google.com/file/d/10NwqDtMvzEVKNwCWssIXj–_oDE4SMc1/view?usp=drivesdk

 

5 Replies to “हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम्, Hanumat Sahasra Name Stotram

  1. आपकी भी जय जयकार हो गुरुजी।
    आपकी वाणी से हनुमत्सहस्रनाम का पाठ श्रवण करने के बाद आपको सादर दण्डवत प्रणाम करता हूॅं।

  2. महाराज जी Pdf लिंक पर क्लिक करने पर रिक्वेस्ट acess के लिए बोल रहा है sumit bness इस नाम से रिक्वेस्ट गया होगा कृपया एक्सेस दे दीजिए🙏 श्री सीताराम

Leave a Reply to लक्ष्मण नामावाल Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *