Post Views: 390 ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् | अभूतिमसमृद्धिं मे सर्वां निर्णुद मे गृहात् ||8|| व्याख्या—भक्त को अपने भूख प्यास ,सुखादि-संसाधनों के अभाव को दूर …
Post Views: 390 ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् | अभूतिमसमृद्धिं मे सर्वां निर्णुद मे गृहात् ||8|| व्याख्या—भक्त को अपने भूख प्यास ,सुखादि-संसाधनों के अभाव को दूर …
Post Views: 381 क्या भगवान कृष्ण बकरी चराते थे ?यदि नही तो “अजा गावो महिष्यश्च “ में अजा का अर्थ बकरी गीता प्रेस के भागवत हिन्दी …
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Post Views: 152राम से बड़ा राम का नाम सुमिरि पवनसुत पावन नामू । अपने बस करि राखे रामू ॥ हे प्रभो आपका नाम आप से …
Post Views: 159श्रीसूक्त मन्त्र-१२ की व्याख्या ॐ आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे | नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ||१२|| …
Post Views: 151श्रीसूक्त मन्त्र -११ की व्याख्या ॐ कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम || श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ||११| व्याख्या— …
Post Views: 194श्रीसूक्त मन्त्र — १० की व्याख्या ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि | पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ||१०|| व्याख्या– इस ऋचा के द्वारा भगवती श्री से …
Post Views: 349श्रीसूक्त मन्त्र-९ की व्याख्या ॐ गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् | ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ||९|| व्याख्या— इस ऋचा के द्वारा श्री जी का …
Post Views: 80श्रीसूक्त मन्त्र-7 की व्याख्या ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह । प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्टेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥7॥ व्याख्या –हे भगवती श्री …
Post Views: 252श्रीसूक्त मन्त्र -६ ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः । तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥6॥ आदित्यवर्णे -हे सूर्य के सदृश कान्ति वाली …
Post Views: 103श्रीसूक्त मन्त्र-५ ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् | तां पद्मनीमीं शरणमहं प्रपद्ये अलक्षमीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ||५|| व्याख्या—चतुर्थ ऋचा द्वारा …
Post Views: 96श्रीसूक्त मन्त्र-४ की विशद हिन्दी व्याख्या ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारमार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् | पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ||४|| व्याख्या – …
Post Views: 82श्रीसूक्त: मन्त्र-3 की व्याख्या अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् | श्रियं देवीमुह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ||३|| अन्वय–अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् श्रियं देवीम् उपह्वये ,श्रीः देवी …
Post Views: 190श्रीसूक्त : मन्त्र-2 की व्याख्या ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥2॥ अन्वय-जातवेदः ! तां अनपगामिनीं लक्ष्मीं …