स्त्रियों, वैश्यों तथा शूद्रों को भगवद्गीता के अनुसार पापयोनि कहना मात्र अज्ञान है

Post Views: 880“स्त्रियों, वैश्यों तथा शूद्रों को भगवद्गीता के अनुसार पापयोनि कहना मात्र अज्ञान है” भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में – “मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य …

गुरु के भेद

Post Views: 157शास्त्रों में गुरु के १२ भेद बतलाये गए हैं १-अध्यापक, २-पिता, ३-ज्येष्ठभाई, ४-राजा, ५-मामा, ६-श्वसुर, ७-रक्षक, ८-नाना, ९-पितामह, १०-बन्धु, ११-अपने से बड़ा, १२- …

साधकों के लिए कल्पवृक्ष–”एकादशमुखहनुमत्कवच”

Post Views: 1,138साधकों के लिए कल्पवृक्ष– ”एकादशमुखहनुमत्कवच” यह एकादशमुख हनुमत्कवच साधकों के लिए सौम्य तथा शत्रुसमूह का विशेष संहारक है । यह कवच सम्पूर्ण राक्षसों …

हनुमानचालीसा में “संकरसुवन” पाठ के औचित्य में प्रमाण

Post Views: 287हनुमानचालीसा में “संकरसुवन” पाठ के औचित्य में प्रमाण किसी भी महापुरुष के ग्रन्थ में पाठपरिवर्तन महापराध है । लिपिकारों से प्रमाद की सम्भावना …

व्याकरणदृष्ट्या भी “संकर सुवन” पाठ ही प्रामाणिक है

Post Views: 103व्याकरणदृष्ट्या भी “संकर सुवन” पाठ ही “हनुमानचालीसा” में सर्वथा प्रामाणिक है, अन्य नही शब्दकल्पद्रुम में प्रमाणपूर्वक यह तथ्य प्रस्तुत किया गया है – …

हनुमानचालीसा में “संकर स्वयं” नहीं अपितु “संकर सुवन” ही प्रामाणिक

Post Views: 108हनुमानचालीसा में “संकर स्वयं” नहीं अपितु “संकर सुवन” ही प्रामाणिक पाठ है। किसी भी महापुरुष के ग्रन्थ में पाठपरिवर्तन महापराध है । लिपिकारों …

शरणागति के अंग और उसकी विधा

Post Views: 515शरणागति के ६ अंग इसी का दूसरा नाम “प्रपत्ति” तथा “न्यासविद्या” भी है । यह उपनिषदों में वर्णित ब्रह्मविद्याविशेष है और निश्चयात्मक ज्ञानस्वरूपा …

सिद्ध विद्वान् सन्त श्रीशास्त्री जी महाराज

Post Views: 57सिद्ध विद्वान् सन्त श्रीशास्त्री जी महाराज, रामघाट, अयोध्या सन्तों की जन्मस्थली,कुल और जननी ये सब उन महापुरुषों की साधना,उदात्त भावना तथा उनके भगवत्साक्षात्कार …

बुद्धिवर्धक मन्त्र

Post Views: 226बुद्धिवर्धक मन्त्र मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत् क्रौञ्चमिथुनादेकमवधी: काममोहितम् ।। महर्षि वाल्मीकि के मुख से सर्वप्रथम इसी श्लोक के रूप …