Post Views: 47 ॥ ययातिरुवाच ॥ ययाति जी बोले– ॥ चण्डिकाया द्विजश्रेष्ठ कथं तत्राश्रमोऽभवत् ॥ कस्मिन्काले फलं तेन किं दृष्टेन भवेन्नृणाम् ॥ १ ॥ हे …
Post Views: 22 स्वज्ञप्त्यधीनज्ञप्त्यधीनज्ञप्तिकत्वम् अन्योन्याश्रयत्वम्। स्वपद से हलन्त्यम् को पकड़ें। हलन्त्यम् ज्ञप्ति के अधीन ज्ञप्ति आदिरन्त्येन सहेता की है। और पुनः उसकी ज्ञप्ति के अधीन …
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Post Views: 10 रघुनाथ मन्दिर,जगद्गुरु श्रीरामानन्दाचार्य पीठ,आबू के छठें अभिषेकमहोत्सव में साधु सन्त महान्तों द्वारा आचार्य सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य जी का सम्मान एवम् उद्बोधन
Post Views: 28 न्याय सिद्धान्त मुक्तावली, द्रव्यादि पंच भाव पदार्थों एवं गुणादि के साधर्म्य का निरूपण,घटत्व, आकाशत्व तथा सामान्य आदि में दोषाप्रसक्ति
Post Views: 27 श्रीमद्भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय, मोह ग्रस्त अर्जुन को भगवान् द्वारा आत्मा की नित्यता का उपदेश Shrimad Bhagvad geeta Ka Dvitiya Adhyaya
Post Views: 18 स्वसम्प्रदायाचार्यविषयकभ्रमभूधरभंग भ्रमभूधरभंगकर्ता- आचार्य सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य श्रीलोकाचार्य जी ने साक्षात् आचार्य को परिभाषित करने के लिए यह सूत्र लिखा है- ‘साक्षादाचार्य इत्युच्यते …
Post Views: 19 https://in.docworkspace.com/d/sIDWmmIPPAb_r56QG?sa=601.1074 https://in.docworkspace.com/d/sIOummIPPAauo-ccG?sa=601.1074 एकादशमुखिहनुमत्कवचम् रुद्रयामलोक्तम् की पाण्डुलिपियां
Post Views: 31 https://in.docworkspace.com/d/sIAqmmIPPAePUmKoG?sa=601.1074 यह रामवर्म अतिगोपनीय है। इसके पाठ से आशातीत लाभ होता है। विना विधि जाने किया हुआ पाठ अधिक लाभ नहीं दे …
Post Views: 8 लघुसिद्धांतकौमुदी, भ्वादिप्रकरण, तिङादि प्रत्याहार परस्मैपद आत्मनेपद सार्वधातुकादि संज्ञाओं का निरूपण
Post Views: 11 भ्वादि १०गणों एवं १० लकारों का विशद परिचय Laghu Siddhant Kaumudi
Post Views: 15 सूत जी यज्ञकुण्ड से समुत्पन्न होने के कारण शूद्र नहीं थे । अग्नि को वेदों में ब्राह्मण कहा गया है । अतएव …
Post Views: 31 https://youtu.be/CKFs_aiSrNQ?si=aaectCc1k2bnoqNQ शास्त्रार्थ:– लक्षणस्य किं लक्षणम्? अव्याप्त्यतिव्याप्त्यसम्भवलक्षणपरिष्कार:। पूर्वपक्षोत्तरपक्षौ।
Post Views: 31 इस वीडियो में हरिनारायण तिवारी के ” एतया निषादस्थपतिं याजयेत्” इस श्रौतवचन में अर्थविषयक महाभ्रम का ढंग किया गया है।
