अध्याय ३६,चण्डिकाश्रम का माहात्म्य,भाग-१

Post Views: 47 ॥ ययातिरुवाच ॥ ययाति जी बोले– ॥ चण्डिकाया द्विजश्रेष्ठ कथं तत्राश्रमोऽभवत् ॥ कस्मिन्काले फलं तेन किं दृष्टेन भवेन्नृणाम् ॥ १ ॥ हे …

अन्योन्याश्रय दोष

Post Views: 22 स्वज्ञप्त्यधीनज्ञप्त्यधीनज्ञप्तिकत्वम् अन्योन्याश्रयत्वम्। स्वपद से हलन्त्यम् को पकड़ें। हलन्त्यम् ज्ञप्ति के अधीन ज्ञप्ति आदिरन्त्येन सहेता की है। और पुनः उसकी ज्ञप्ति के अधीन …

छठां अभिषेकमहोत्सव,श्रीरघुनाथ मन्दिर नक्की लेक माउंट आबू

Post Views: 10 रघुनाथ मन्दिर,जगद्गुरु श्रीरामानन्दाचार्य पीठ,आबू के छठें अभिषेकमहोत्सव में साधु सन्त महान्तों द्वारा आचार्य सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य जी का सम्मान एवम् उद्बोधन

न्याय सिद्धान्त मुक्तावली, द्रव्यादि पंच भाव पदार्थों एवं गुणादि के साधर्म्य का निरूपण

Post Views: 28 न्याय सिद्धान्त मुक्तावली, द्रव्यादि पंच भाव पदार्थों एवं गुणादि के साधर्म्य का निरूपण,घटत्व, आकाशत्व तथा सामान्य आदि में दोषाप्रसक्ति

श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय का मूल पाठ

Post Views: 27 श्रीमद्भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय, मोह ग्रस्त अर्जुन को भगवान् द्वारा आत्मा की नित्यता का उपदेश Shrimad Bhagvad geeta Ka Dvitiya Adhyaya

प्रो• कमलाकान्त जी के स्वाचार्यविषयक भ्रमभूधर का भंग, समीक्षा भाग-४

Post Views: 18 स्वसम्प्रदायाचार्यविषयकभ्रमभूधरभंग भ्रमभूधरभंगकर्ता- आचार्य सियारामदास नैयायिक वैष्णवाचार्य  श्रीलोकाचार्य जी ने साक्षात् आचार्य को परिभाषित करने के लिए यह सूत्र लिखा है- ‘साक्षादाचार्य इत्युच्यते …

एकादशमुखिहनुमत्कवचम् रुद्रयामलोक्तम् की पाण्डुलिपि

Post Views: 19 https://in.docworkspace.com/d/sIDWmmIPPAb_r56QG?sa=601.1074 https://in.docworkspace.com/d/sIOummIPPAauo-ccG?sa=601.1074 एकादशमुखिहनुमत्कवचम् रुद्रयामलोक्तम् की पाण्डुलिपियां 

ब्रह्माण्ड महापुराण के रामवर्म की पाण्डुलिपि

Post Views: 31 https://in.docworkspace.com/d/sIAqmmIPPAePUmKoG?sa=601.1074 यह रामवर्म अतिगोपनीय है। इसके पाठ से आशातीत लाभ होता है। विना विधि जाने किया हुआ पाठ अधिक लाभ नहीं दे …

लघुसिद्धांतकौमुदी, भ्वादिप्रकरण, तिङादि प्रत्याहार परस्मैपद आत्मनेपद सार्वधातुकादि संज्ञाओं का निरूपण    

Post Views: 8 लघुसिद्धांतकौमुदी, भ्वादिप्रकरण, तिङादि प्रत्याहार परस्मैपद आत्मनेपद सार्वधातुकादि संज्ञाओं का निरूपण     

शास्त्रार्थ:– लक्षणस्य किं लक्षणम्? अव्याप्त्यतिव्याप्त्यसम्भवलक्षणपरिष्कार:।

Post Views: 31 https://youtu.be/CKFs_aiSrNQ?si=aaectCc1k2bnoqNQ शास्त्रार्थ:– लक्षणस्य किं लक्षणम्? अव्याप्त्यतिव्याप्त्यसम्भवलक्षणपरिष्कार:। पूर्वपक्षोत्तरपक्षौ।

हरिनारायण तिवारी की वेदार्थविषयक भ्रान्ति का निराकरण

Post Views: 31 इस वीडियो में हरिनारायण तिवारी के ” एतया निषादस्थपतिं याजयेत्” इस श्रौतवचन में अर्थविषयक महाभ्रम का ढंग किया गया है।