Post Views: 15 किसी गाँव मे एक साधु रहा करता था ,वो जब भी नाचता तो बारिस होती थी . अतः गाव के लोगों को …
Post Views: 77 श्रीराम जय राम जय जय राम मन्त्र का पुरश्चरण रामरहस्योपनिषद् में बतलाया गया है कि “श्रीराम जय राम जय जय राम” …
Post Views: 20 प्रो• हरिनारायण तिवारी ने ” एतया निषादस्थपतिं याजयेत्” इस श्रुतिवाक्य को लेकर जिस अमर्यादित भाषा में प्रश्न तथा आक्षेप किया है। उसका …
Post Views: 6 मृच्छकटिकम् गुणेषु यत्नः पुरुषेण कार्यो न किञ्चिदप्राप्यतमं गुणानाम् || गुणप्रकर्षादुडुपेन शम्भो रलङ्घ्यमुल्लङ्घितमुत्तमाङ्गम्। पुरुषेण=जनेन, गुणेषु=दयादाक्षिण्यादिगुणोपार्जनेषु,यत्न:= प्रयत्न:, कार्य:=करणीय:, गुणानाम्= गुणयुक्तजनानां, किञ्चिदपि वस्तु, …
Post Views: 114 “श्रीशिवाय नमस्तुभ्यम्” मन्त्र में प्रमाण श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं मुखं व्याहरते यदा । तन्मुखं पावन तीर्थं सर्वपापविनाशनम्।। — शिवमहापुराण, विश्वेश्वरसंहिता–23-7 “श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं” जब मुख …
Post Views: 194 पत्नी दासीसमा यस्य वासनाशान्तिसाधनम्। मनुते य: कुलाङ्गार: नरो नैव स राक्षस: ।।१३।। जो पत्नी को दासी के समान तथा उसे मात्र …
Post Views: 484 पतिघ्नी दुष्ट भार्या सा या सदा कटुभाषिणी। कुम्भीपाकं चिरं भुङ्क्त्वा जायते कुक्कुरी तत:।।९।। पति का हनन करने वाली दुष्ट भार्या वह …
Post Views: 132 देहादिषु त्वहंबुद्धि: विचारेण निवर्तते। मोक्षाय साधनं सर्वं व्यर्थं हि निर्विचारकम्।।६।। देह आदि में जो अहंबुद्धि है । वह सम्यक् विचार से …
Post Views: 99 मित्रं सखे सदा ग्राह्यं यत्ते लक्ष्यं प्रसाधयेत्। लक्ष्यघ्नञ्चेद्भवेज्ज्ञातं तदा त्याज्यं मनीषिणा ।।५।। हे मित्र ! मित्र का संग्रह सदा करना चाहिए। …
Post Views: 154 यो ददाति सदा दु:खं सज्जनान् वाथ साधकान्। तेन पापेन दुष्टात्मा निरयं याति सत्वरम्।। जो प्राणी सज्जनों अथवा साधकों को सदा दु:खी करता …
Post Views: 432 नारियों को गुरु बनाना चाहिए या नहीं ??–इस विषय पर बड़ा विवाद चल रहा है । शास्त्रीय प्रमाणों के कुछ वाक्य प्रस्तुत …
Post Views: 194 होलिकारमणी दिव्या अर्बुदे वीक्ष्य राघवम् । चुम्बति चाथ मा मैवं भाषते चारुहासिनी ।। होलिकारूपिणी दिव्य रमणी अर्बुदाचल( माउंट आबू ) में षोडश …
Post Views: 294 “भ्रातृद्वितीया अर्थात् भैयादूज से नारी विधवा नहीं होती और भाई की आयु बढ़ती है “ भ्रातृद्वितीया– अर्थ–भ्रातृमङ्गलार्था भ्रातृभोजनार्था वा द्वितीया इति भ्रातृद्वितीया …
