महाश्रीमन्त्रविषयकभ्रमभूधरभंग,समीक्षा-भाग-३

Post Views: 21 आक्षेप श्रीमान् नैयायिक जी ने अपने लेख में चौदह या पन्द्रह बार ‘नारायणमन्त्र’ के ऊपर आक्षेप करने के लिए नारायणमन्त्र कहा है …

श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा”भाग-२

Post Views: 21 श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा” लेख की आपत्तियां पूर्ववत् गर्ज रही हैं। श्रीरामानुजीय विद्वान् प्रो•श्रीकमलाकान्त त्रिपाठी जी के लेख …

व्यासासन ब्रह्मासन अर्थात् ब्राह्मण का आसन है, शूद्रों का नहीं, सूत ,व्यास, वाल्मीकि ब्राह्मण हैं ।

Post Views: 87 व्यासासन ब्रह्मासन अर्थात् ब्राह्मण का आसन है, शूद्रों का नहीं, सूत ,व्यास, वाल्मीकि ब्राह्मण हैं । Vyasasan Brahmasan Arthat Brahmano ka Aasan …

अर्थविचार सहित नाम जप से लाभ, अजामिलोपाख्यान

Post Views: 24 श्रीमद्भागवत कथा के इस प्राचीनबर्हि और देवर्षि नारद के संवाद में प्रसंगत: अर्थविचार सहित नाम जप से विशेष लाभ का वर्णन किया …

कमलाकान्त त्रिपाठी जी के आक्षेप का खण्डन भाग-१

Post Views: 25 श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा” लेख की आपत्तियां पूर्ववत् गर्ज रही हैं।   https://www.facebook.com/share/p/uRsSTzyQUXfMLVqB/?mibextid=qi2Omg   श्रीरामानुजीय विद्वान् प्रो•श्रीकमलाकान्त त्रिपाठी …

श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा

Post Views: 55 श्रीरामकृष्णादिमन्त्रों के निन्दापरक श्रीवचनभूषणकार के कथन की समीक्षा श्रीमज्जगद्गुरवे रामानन्दाचार्याय नम: रामानुज संप्रदाय के मान्य ग्रन्थ श्रीवचनभूषणम् के भाष्य में भगवान् श्रीराम …

षडक्षर राममन्त्रराज की प्रयोगात्मक जप विधि

Post Views: 84 श्री रामानन्द संप्रदाय में श्रीराम मंत्रराज की परंपरा अविच्छिन्न रूप से चली आ रही है । राम मंत्र के आदि उपदेष्टा भगवान …

निग्रहाचार्य भागवतानंद की भ्रांति एवम् उनके अज्ञानमूलक आक्षेपों का खण्डन

Post Views: 6   सर्वेश्वरश्रीरघुनाथो विजयतेतराम् निग्रहाचार्य जी की भ्रान्ति एवम् उनके अज्ञानमूलक आक्षेपों का खण्डन Nigrahacharya Ji Ki Bhranti Evam Unke Agyanmulak Akshepon Ka …

श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय का शुद्ध उच्चारण

Post Views: 12 पाठशुद्धिहेतु श्रवण । श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय का पाठ करने एवं सुनने तथा शुद्ध पाठ हेतु मूलपाठ सुनें।