Post Views: 83 क्या अहिंसा सदा ही परम धर्म है ? “अहिंसा परमो धर्मः” यह वाक्य अति प्रसिद्ध है । जिसके द्वारा अहिंसा को सर्वश्रेष्ठ …
Author: Gaurav Sharma
Post Views: 34 »»»»»»»»» केनोपनिषद्,मन्त्र 3, जगत् ब्रह्म नहीं है । «««««« यद्वाचानभ्युदितं येन वागभ्युद्यते । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ।। 3 .. …
Post Views: 233 भगवान् परशुराम क्षत्रिय जाति के विरोधी नहीं थे “जहि दुष्टान् नृपोत्तमान्।”-इस आज्ञा के अनुसार जामदग्न्य ने दुष्ट राजाओं का वध किया , …
Post Views: 133 मुस्लिमों के कब्र की मूल परम्परा वर्गविशेष के राक्षसों से चली है-सप्रमाण विवेचन हमारे शास्त्रों में मृत शरीर के ३परिणाम बताये गये …
Post Views: 92 भगवान् श्रीराम शूर्पणखा से विवाहित लक्ष्मण जी को कुआंरा क्यों कहे ? शूर्पणखा भगवान् राम के पास प्रणय याचना करने आयी और …
Post Views: 130 यात्राकाल में हनुमत्स्मरण से लाभ हम यात्रा जब करते है तब किसी दुर्घटना या चोर डाकुओं के भय अथवा शत्रुओं से किसी …
Post Views: 84 भगवान के अंश,कला और पूर्णावतार का रहस्य वनवासी राम का केवट से गंगा पार उतरना भागवत में “एते चांशकलाः पुंस: कृष्णस्तु भगवान् …
Post Views: 40 ईशावास्योपनिषद्,मन्त्र12, केवल निषिद्धकर्मत्याग और केवल उपासना का परिणाम अन्धन्तमः प्रविशन्ति येऽसम्भूतिमुपासते । ततो भूय इव ते तमो य उ सम्भूत्यां रताः ।।12।। …
Post Views: 41 ईशावास्योपनिषद्,मन्त्र-६,ब्रह्ममय दर्शन का फल यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति । सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ।।6।। पूर्वमन्त्र में बतलाया गया कि परमात्मा सभी वस्तुओं …
Post Views: 29 ईशावास्योपनिषद्,मन्त्र ५ ब्रह्म की विचित्र शक्तिमत्ता तदेजति तन्नैजति तद्दूरे तद्वन्तिके । तदन्तरस्य सर्वस्य तदु सर्वस्य बाह्यतः ।। 5 .. येनाक्षरं पुरुषं वेद …
Post Views: 44 ईशावास्योपनिषद्, मन्त्र-4,परमात्मा की विलक्षण शक्तिमत्ता “अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन् पूर्वमर्षत् । तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ।।४।।” पूर्व मन्त्र में निष्काम कर्मयोग …
Post Views: 45 ईशावास्योपनिषद्,मन्त्र-3,निष्काम कर्मयोग की अवहेलना से हानि असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसावृताः । तांस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महना जनाः ।।३ ।। पूर्वमन्त्र …
Post Views: 72 ईशावास्योपनिषद्, मन्त्र-२,मोक्षोपकारक निष्काम कर्मयोग कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः । एवं त्वयि नान्यथेतोस्ति न कर्म लिप्यते नरे ।।२।। पूर्व मन्त्र से भगवान सबमें …
Post Views: 167 ईशावास्योपनिषद् में १८ मन्त्र हैं । जिनमें जीवात्मा और परमात्मा के स्वरूप पर प्रकाश डालने के साथ ही हमारा क्या कर्तव्य है …
